• January 30.2021

  • विजय शेखर शर्मा

आइडिया और वक्त की पहचान किस तरह किसी व्यक्ति को फर्श से अर्श पर पहुंचा सकती है, पेटीएम के प्रमुख विजय शेखर शर्मा आज इसके सबसे बड़े उदाहरण हैं। आईये जानें उस विजय शेखर शर्मा के बारे में जिन्होंने अपनी कामयाबी की इबारत जोश और जूनून से लिख दी है। विजय शेखर शर्मा के जीवन में एक दौर ऐसा भी आया था, जब उनके पास खाने के पैसे तक नहीं थे। पेटभर खाने के लिए वह बहाने बनाकर दोस्तों के पास पहुंच जाते थे और खाना खाते थे। इन सब दिक्कतों के बावजूद उन्‍होंने हिम्मत नहीं हारी और उनके हिम्मत न हारने का परिणाम आज हम सभी देख सकते हैं।

विजय शेखर के निजी जिंदगी की बात करें तो उनकी शिक्षा सरकारी हिंदी माध्यम के स्कूलों में हुई। दिल्ली के इंजीनियरिंग कॉलेज में अंग्रेजी नहीं बोल पाने की वजह से उन्हें कई बार बड़ी परेशानी हुई, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। डिक्शनरी से हिंदी को अंग्रेजी में ट्रांसलेट करके पढ़ते थे और कुछ ही दिनों में फरार्टेदार अंग्रेजी बोलना भी सीख गए।

विजयशेखर शर्मा ने साल 2001 में 2 लाख रुपए लगाकर ङ्मल्ली-97 नाम की कंपनी की शुरूआत की, जो मोबाइल से जुड़ी वैल्यू ऐडेड सर्विसेस देती थी। कॉमर्स में ज्यादा अनुभव न होने के कारण कंपनी की हालत एक साल में ही खराब होने लगी। खाने-पीने के लिए भी उनके पास पैसे तक नहीं बचे। दो वक्त सिर्फ चाय पीकर ही गुजारा करते थे। पैसे बचाने के लिए वे बस के बजाए पैदल चलते थे। घर-घर जाकर कम्‍प्यूटर के छोटे-मोटे काम करते थे। लेकिन कहते हैं न कोशिश करने वालों की हार नहीं होती। विजय की भी कोशिशें रंग लाने लगीं और उनकी कम्पनी धीरे-धीरे पटरी पर लौटने लगी और मुनाफा कमाने लगी। किराने का सामान, आॅटोवाले को पैसे देते वक्त छुट्टे की दिक्कत ने उनको स्रं८३े जैसी कंपनी बनाने के लिए प्रेरित किया। स्रं८३े को 2011 में लॉन्च किया गया था।

बिजनेस बढ़ने पर पेटीएम में आनलाइन वॉलेट, मोबाइल रिचार्ज, बिल पेमेंट, मनी ट्रान्सफर और शॉपिंग फीचर भी जोड़ दिए। विजय शेखर शर्मा ने खुद को साबित करने के साथ ही उन तमाम लोगों को सीख दे दी है कि कोई भी काम करने के लिए मेहनत और हौसले की जरूरत होती है।

क्या है आपकी कहानी ज़िद्द की ? हमें बताएँ   +91-8448983000