• January 2.2021

  • श्रीधन्या सुरेश

यूपीएससी ने साल 2020 में होने वाली प्रीलिमनरी परीक्षा के लिए फॉर्म जारी कर दिए हैं। दरअसल, इस परीक्षा में हर साल कई आईएएस और आईपीएस बनने के लिए लाखों लोग शामिल होते हैं। लेकिन इनमें से कुछ लोग ही अपने लक्ष्य को हासिल कर पाते हैं और लक्ष्य वहीं हासिल कर पाते है जिनके अंदर जुनून सवार होता है। हम आपको बताऐगें कि आप किस जुनून को रखकर इस मुकाम को पा सकते है।

दरअसल, हम आपको एक ऐसी ही लड़की की कहानी बताने जा रहे हैं, जिसने कम सुविधा होने के बावजूद, अपने दम पर यूपीएससी की परीक्षा पास कर आईएएस बनी हैं। पिछले साल 2019 में जब यूपीएससी परीक्षा का रिजल्ट आया तो परीक्षा में कई ऐसे चेहरे सामने आए हैं, जिन्होंने मुश्किल हालात में पढ़ाई कर परीक्षा पास की थी। इन्हीं में एक नाम था श्रीधन्या सुरेश का, जो केरल के वायनाड जिले की रहने वाली हैं। 2018 में हुई यूपीएससी की परीक्षा में उन्होंने 410वीं रैंक हासिल की थी। श्रीधन्या सुरेश केरल की पहली आदिवासी लड़की है, जिन्होंने यह परीक्षा पास की है। उनके पिता मनरेगा में मजदूरी करते थे और बाकी समय धनुष-तीर बेचा करते थे उनकी आर्थिक स्थिति इतनी ठीक नहीं होने के कारण परिवार को घर बनाने के लिए सरकार से जमीन मिली थी, लेकिन जमीन मिलने के बाद भी उनके पास पैसों की कमी थी। जिसके बाद उनका परिवार घर नहीं बनवा पाया। जब श्रीधन्या यूपीएसई की तैयारी कर रही थीं तो आधे- अधूरे बने घर में अपने माता-पिता, और दो भाई-बहनों के साथ रहती थीं। उनके माता- पिता गरीब थे, लेकिन पैसों की कमी को कभी पढ़ाई के बीच में नहीं आने दिया। श्रीधन्या ने कोझीकोड के सेंट जोसफ कॉलेज से ग्रेजुएशन की डिग्री ली, उसके बाद ही उसी कॉलेज से जूलॉजी में पोस्ट ग्रेजुएशन किया। पढ़ाई पूरी होने के बाद वह अनुसूचित जनजाति विकास विभाग में क्लर्क के पद पर काम करने लगी। इसके बाद उन्होंने वायनाड के एक आदिवासी हॉस्टल में वार्डन के तौर पर काम किया। यहीं पर ही उन्हें यूपीएससी परीक्षा देने के लिए मोटिवेट किय गया।

यूपीएससी परीक्षा में तीसरे प्रयास में उनका सिलेक्शन इंटरव्यू के लिए हुआ था। उस समय श्रीधन्या के पास दिल्ली आने के लिए पैसे भी नहीं थे, लेकिन दोस्तों से मिलकर उन्होंने पैसे जमा किए और दिल्ली आकर इंटरव्यू दिया। श्रीधन्या ने एक इंटरव्यू में बताया था कि मैं राज्य के सबसे पिछड़े जिले से हूं। यहां से कोई आदिवासी आईएएस अधिकारी नहीं हैं। उन्होंने कहा कि मेरा जुनून और जिद्द ने ही मुझे इस मुकाम पर पहुंचाया है। अगर मै जरा भी इससे दूर होती तो शायद आज में यहां नहीं बल्कि कहीं ओर होती। इसलिए आप अपना लक्ष्य निर्धारित कीजिए तभी कोई काम कीजिए।


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