• January 2.2021

  • Varun Baranwal

सफल तो हर कोई बनना चाहता है। लेकिन हर कोई उस मंजिल को नहीं छू पाता है। जहां उसको पहुंचना होता है। पहुंचता वहीं है जो अपने मिशन के साथ अपना विजन भी तय करता है। दरअसल, आज हम जिस शख्स का जिक्र कर रहे हैं उनकी कहानी कुछ पुरानी है, लेकिन आज वह जिस मुकाम पर हैं, उसके पीछे किया गया संघर्ष हर युवा में कुछ कर गुजरने का जोश भर देगा। जी हां।यह कोई ओर नहीं बल्कि, आईएएस आॅफिसर वरुण बरनवाल है जो कभी साइकिल पंचर की दुकान में काम करते थे। और यहीं पंचर बनाने वाले आईएएस बनकर एक मिसाल पेश की है।

वरुण महाराष्ट्र के एक छोटे से शहर बोइसार के रहने वाले हैं, जिन्होंने साल 2013 में हुई यूपीएससी की परीक्षा में 32वां स्थान हासिल किया। इनकी कहानी आम कहानी जैसी नहीं है। वरुण की जिंदगी में उनकी मां, दोस्त और रिश्तेदारों का अहम रोल है। वरुण ने अपने संघर्ष के बारे में बताया कि जीवन बेहद ही गरीबी में बीता। पढ़ने का मन था लेकिन पढ़ाई के लिए पैसे नहीं थे। 10वीं की पढ़ाई करने के बाद मन बना लिया था अब साइकिल की दुकान पर काम ही करूंगा। क्योंकि आगे की पढ़ाई के लिए पैसे जुटा पाना मुश्किल था। पर किस्मत को कुछ और ही मंजूर था।

उन्होंने बताया मेरे घरवालों ने काफी सपोर्ट किया। मां ने कहा ‘हम सब काम करेंगे, तू पढ़ाई कर’। उन्होंने बताया 11वीं-12वीं मेरे जीवन के सबसे कठिन साल रहे हैं। मैं सुबह 6 बजे उठकर स्कूल जाता था, जिसके बाद 2 से रात 10 बजे तक ट्यूशन लेता था और उसके बाद दुकान पर हिसाब करता था।

वरुण ने बताया कि एडमिशन के लिए हमारे घर के पास एक ही अच्छा स्कूल था। लेकिन उसमें एडमिशन लेने के लिए 10 हजार रुपये डोनेशन लगता है। जिसके बाद मैंने मां से कहा रहने दो पैसे नहीं है। मैं 1 साल रुक जाता हूं। अगले साल दाखिला ले लूंगा।। लेकिन उन्होंने बताया मेरे पिता का जो इलाज करते थे, वह डॉक्टर हमारी दुकान के बाहर से जा रहे थे। जिसके बाद उन्होंने मुझसे सारी बात पूछी और फिर तुरंत 10 हजार रुपये निकाल कर दिए और कहा जाओ दाखिला करवा लो। वरुण खुद को बड़ा किस्मत वाला मानते हैं उन्होंने बताया मैंने कभी 1 रुपये भी अपनी पढ़ाई पर खर्च नहीं किया है। कोई न कोई मेरी किताबों, फॉर्म, फीस भर दिया करता था। मेरी शुरूआती फीस तो डॉक्टर ने भर दी, लेकिन इसके बाद टेंशन ये थी स्कूल की हर महीने की फीस कैसे दूंगा। जिसके बाद मैंने सोच लिया अच्छे से पढ़ाई करूंगा सब कुछ अच्छे करने के बाद उस दौरान मेरी प्लेसमेंट तो काफी अच्छी हो गई थी। काफी कंपनी के नौकरी के आॅफर मेरे पास थे, लेकिन जब तक सिविल सर्विसेज परीक्षा देने का मन बना लिया था। वरुण ने मन तो बना लिया था लेकिन समझ नहीं आ रहा था कि मैं तैयारी कैसे करनी है। जिसके बाद उनकी मदद उनके भइया ने की। उन्होंने बताया, जब यूपीएससी प्रिलिम्स का रिजल्ट आया तो मैंने भइया से पूछा कि मेरी रैंक कितनी आई है- जिसके बाद उन्होंने कहा 32वां ये सुनकर वरुण की आंखों में आंसू आ गए। उन्हें यकीन था अगर मेहनत और लगन सच्ची हो बिना पैसों के भी आप दुनिया का हर मुकाम हासिल कर सकते हैं।

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