• December 24.2020

  • नितिन कलाल

आज आपके बहुत सारे सपने होंगे जो आप अपनी ज़िन्दगी में प्राप्त करना चाहते हैं, वो कुछ भी हो सकता है। सपने देखना अच्छा है लेकिन ये सपने तब तक आपके पूरे नहीं हो सकते जब तक आपके अंदर इन सपनो को पूरा करने की ज़िद नहीं होगी। ऐसी ही ज़िद्द थी राजस्थान के डूंगरपुर जिले में जन्मे और पले-बढ़े नितिन कलाल की। उनकी परवरिश तो एक छोटे शहर की थी लेकिन उनके सपने बड़े थे।उन्होंने लेखक बनने का सपना देखा, मगर अपने सपनों पूरा करने का उनका यह सफर आसान नहीं रहा। कहा जाता है कि हर विपत्ति को धीरज से पार करना होता है,और नितिन बस यही करते गए। आये जाने उन्ही से कैसे उन्होंने अपने लेखक बनने के सपनो को मंज़िल तक पहुंचाया।

“मैं लेखक, कवी, मैडिकल प्रेक्टिशनर और स्किल ट्रैनर हुँ। छोटे से शहर मे माँ-बाप के लिये बच्चों की सफलता का केवल एकमात्र मापदंड है, और वो है बच्चो का सरकारी नौकरी लगना। मेरा अपना परिवार भी औरों से बहुत ज्यादा अलग नही था, उनकी भी अपनी यही चाहत थी या शायद अब तक है। लेकिन इन सब से हटकर मैनें अपने लिये एक सपना देखने की जिद की, अपने विचारों को कहानी के रुप मे दुनिया को सुनने का सपना। मेरी अपनी चाहत सरकारी नौकरी से कई अधिक मेरे सपनों को फॉलो करने की थी।

मैं कक्षा सातवीं से ही कविताएँ लिखता था, और फिर धीरे-धीरे कहानियां भी लिखने लगा। अब-तक मेरी 5 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी है, जिनमें से 2 काव्य-संग्रह और 3 अंग्रेजी नॉवेल है। मैनें अपनी पहली नॉवेल 2016 में अन्तिम वर्ष नर्सिंग के दौरान लिखी। नर्सिंग के अन्तिम वर्ष में एग्ज़ाम के ठीक एक माह पहले मुझे मलेरिया-टायफाईड़ हो गया था। इन दिनों मेरा पुरा समय बिस्तर पर ही गुजरता था, मेरे लिये यह शारिरीक आपदा मेरे लिये एक अवसर लेकर आयी, और इसी एक माह में मैंने अपना पहला नॉवेल लिखा, जो जनवरी 2017 में प्रकाशित हुआ था।

पहली नॉवेल के लेखन से उसके प्रकाशन तक मेरे लिये सबकुछ बिल्कुल नया था, मेरे लिये किसी पर भी यकिन करना मुश्किल था। और इससे भी ज्यादा मुश्किल था जब मैं किसी को अपने असल सपनों के बारे मे बताता, उनसे कहता की मुझे राइटर बनना है और जवाब मे वो मुझ पर हँसकर वो मेरा मजाक बना देते थे । जैसा की छोटे शहरों मे सही सलाह मिलना लगभग नामुमकिन है, लेकिन मुझे अपने सपने को पुरा करना था, यह मेरी अपनी चाहत से कई अधिक अब जिद बन चुका था। परिजनों और रिश्तेदारों पर आपके कुछ अलग और अनोखा करने का प्रभाव जरुर पड़ता है किन्तु वो क्षणिक होता है, वक़्त के साथ वो दोबारा से अपना पुराना राग अलापने लगते है, जिसमे सरकारी नौकरी से अलग कुछ भी स्वीकार्य नही होता। जहाँ सरकारी नौकरी एकमात्र सफलतम जीवन का आधार है। मै भी मानता हू की सरकारी नौकरी शायद एक सफल भविष्य का आधार हो सकती है, जहाँ शायद कभी आर्थिक रुकावट का सामना ना करना पड़े, लेकिन माँ-बाप को भी यह समझना होगा की अगर बच्चा अपने सपनों को साकार करना चाहता है तो उसे वो मौका जरुर दे, वो अपने पसंद के काम के साथ ज्यादा खुश रह सकता है, बजाय इसके की वो सिर्फ आर्थिक सक्षम होने के लिये अपनी ना-पसंद की नौकरी में रहे। मुझे याद है जब एक बार मैने अचानक ही मम्मी से बोला था की मैं जीवन भर की तकलीफें झेल सकता हुँ लेकिन अगर राइटर नही बना तो शायद पागल हो जाऊंगा।

लेकिन इन सब पर मेरी जिद, अपने सपनों के लिये मेरा पागलपन और लेखन के प्रती मेरा जुनून ज्यादा हावी था। मुझे खुद को साबित करना था वो भी हर हाल में।“

नितिन कलाल की अपने लेखक बनने की कहानी ज़िद्द से यह साबित होता है कि यदि आप बड़े सपने देखने और उसे वास्तविकता में बदलने की आकांक्षा रखते हैं तो कोई भी सीमा आपको रोक नहीं सकती है।

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