• October 31.2020

  • SHIVRAM PADHLI

जीवन मैं मुश्किलें कभी बताकर नहीं आती, ऐसा कोई व्यक्ति नहीं जिसके जीवन मैं कठनाइयाँ ना आती हूँ। प्रकर्ति मैं सुख के साथ भगवान ने सबकी ज़िन्दगी मैं थोड़ा मुश्किल वक़्त भी लिखा है। एक मासूम फूल से लेकर पशु तक के जीवन मैं कठनाइयाँ तो हम इंसान कैसे बच सकते है इससे। परन्तु जैसे कहते है न सोना आग मै तपकर ही निखरता है ऐसे हम मनुष्ये भी मुश्किलों मैं तपकर ही निखारते है और बेहतर बनता है। ऐसी ही आग मैं तपकर श्री शिवराम पढ़लि जी और बेहतर बने है।

श्री शिवराम जी एक मिडिल क्लास फॅमिली से थे , बचपन गाँव मैं बीता परन्तु पढ़ने की इच्छा और अपना बिज़नेस सेट करने की इच्छा न उन्हें कभी गाँव मैं रहकर भी गाँव वाला नहीं बने दिया। शिवराम जी एक “ज़िद्द” CA बने कि उन्हें मुंबई ले गयी वहाँ कही संघर्षो के बाद उन्होंने अपनी CA कम्पलीट करी और अपनी प्रैक्टिस स्टार्ट करी परन्तु एक इच्छा अपना बिज़नेस सेट करने की अभी भी थी। उन्होंने अपना बिज़नेस स्टार्ट किया कुछ वक़्त तक सब बहुत बढ़िया था परन्तु कहते है न कि सबके जीवन मैं शान्ति भी लम्बे वक़्त तक नहीं रहती। शिवराम जी का बिज़नेस मैं कुछ वक़्त बाद ही बड़ा नुक्सान होगया। उनकी जैसे पूरी ज़िन्दगी ही उथल पुथल होगयी थी मानों परन्तु एक “ज़िद्द” जो इंसान को आगे बढ़ने मैं मदद करती है उसने शिवराम जी को हौसला दिया अपना बिज़नेस वापिस सेट करने का।

किसी ने सही कहा है व्यक्ति कितनी भी परेशानी मैं हो, उससे वह खुद ही उस परेशानी से बहार निकाल सकता है और इन सबसे बहार निकलने का हौसला देता है एक छोटा सा शब्द “ज़िद्द”।

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