• October 31.2020

  • नमिता

ज़िन्दगी हमे बहुत कुछ दिखती और उससे हम काफी कुछ सिख जाते हैं।

मैं जब छ: माह की ही थी तब किसी कारण वश मेरी माँ मुझे छोड़ कर चली गयी थी। वह हमारे साथ न रह कर मेरी नानी यानि उनकी माँ के पास रहती थी। मेरे पापा और मेरी दादी ने ही मेरी परवरिश करी है। एक छोटे से बचे के ऊपर माँ का सहरा न हो तो समझ सकते है की उस पर क्या बीती होगी। मैंने अपनी ज़िन्दगी में बहुत कुछ देखा है। कई मानसिक, शारीरिक परेशानियां झेलनी पड़ी। मेरी पढ़ाई भी बहुत मुश्किल से हुई। सिर्फ 12 -13 साल की ुमार में ही मुज पैर घर की कई ज़िम्मेदारियाँ दाल दी गयी थी। मुझ उस समय अपनी पढ़ाई के साथ सारे घर का भी ख्याल रखना पड़ता था। 14 साल की उम्र में मेरी शादी हो गयी। मेरी लव मैरिज थी और भगवन की कृपा से मुझे एक बहुत अच्छा पाती मिले। मेरा हमेशा से एक सपना रह की माँ अपनी ज़िन्दगी में कुछ करूं, आगे बडूँ।

मेरे पा भी चहते थे की मैं एयर होस्टेस बनु। लेकिन पासो की कमी के कारण मेरा ये सपना पूरा न हो सका।

मेरी शादी हो गयी, लेकिन मन में कुछ करने की इच्छा जाएगी रही। लेकिन मेरे ससुराल वालो को औरतो का बहार जा कर काम करना अच्छा नहीं लगता था, वह इसके सख्त खिलाफ थे। मगर मेरे दिल ने तोह जैसे कोई ज़िद्द थान राखी थी कुछ केर दिखने की। में हर समय कहि न कहि देखती रहती थी की कहीं कोई काम ऐसा मिले जो में कर सकू।

फिर एक दिन मैं फेसबुक देख रही थी तभी मुझे AIPL ABRO के एक सेल्स मैनेजर की पोस्ट दिखी जो की Women Empowerment के बारे में थी। मैने उनसे मिल कर इस कार्यकम के बारे में जाना और मैं इनके साथ जुडी। अब मैं अपने पारो में कड़ी हूँ और अच्छा कमा लेती हूँ। मेरे पापा आज इस दुनिया में नहीं है लेकिन जहाँ भी होंगे वो खुश होंगे की मेरी बेटी ने अपना सपना पूरा किया और अपने दिल की ज़िद्द पूरी की।

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