• October 3.2020

  • आकांक्षु श्रीवास्तव

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सुना हैं कि जिंदगी का हर मोड़ एक नई सीख देकर जाता है. अपने ऊपर भरोसा रखने वाला ही जिंदगी के तमाम मुश्किलों को सफलतापूर्वक दूर कर देता है और अपनी इच्छाशक्ति से जीवन में सबसे सफल इंसान बनता है।

जीवन में कुछ लोग ऐसे आते हैं, जो आपको जाने-अनजाने में कुछ ऐसा एहसास करा जाते हैं की आपको अपनी ज़िन्दगी का अर्थ समझ आ जाता है। ऐसा ही कुछ हुआ आकांक्षु श्रीवास्तव जी के साथ। एक इंसान के मुँह से निकली बात उनकी जिंदगी को मकसद दे गयी। इस कहानी के ज़रिये जाने उनकी ज़िन्दगी जिनने की ज़िद्द को।

“बेटा आप की ज़िंदगी इस लायक थी कि बचाई जा सके इस लिए बचाई गई। मैं नही जानता ये शब्द मेरे कानों में कितने सालों से गूँज रहे हैं और कितने सालों से भग्वद गीता के मंत्र की तरह मेरे जीवन को ऊर्जामान बना रहे हैं।

लखनऊ मे मैं कक्षा दो में पढता था। मैं और मेरी छोटी बहन अक्सर स्कूल आते जाते समय एक तालाब के बगल से निकलते थे। उस तालाब में छोटे-छोटे सफ़ेद रंग के कमल के फूल निकल आया करते थे। मैं स्कूल से लौटते समय अक्सर तालाब के किनारे जाता और पास के फूलों को तोड़कर अपने घर ले जाता। कमल के फूलों की एक आदत होती है कि वो पानी की धारा के साथ हिला करते हैं।

एक दिन मैं उस तालाब के पास फूल तोड़ने उतरा। फूल थोडी दूर था और मैं धीरे-धीरे उस फूल का पीछा करते हुए गहरे तालाब में जा पहुँचा और मैं डूबने लगा। मैंने शायद दो या तीन बार आवाज लगाई – बचाओ बचाओ। मेरी बहन भी आवाज लगा रही थी कि – बचाओ बचाओ। तभी एक इन्सान तालाब में कूदता है और मेरा हाथ पकड़ के मुझे निकालता है। जब मैं होश में आता हूँ तो बोलता हूँ, “भैया धन्यवाद आपने मेरी ज़िन्दगी बचा ली”। उस इन्सान के शब्द थे, “बेटा आपकी ज़िन्दगी इस लायक थी कि बचाई जा सके, इसलिए बचाई गई।

ये मेरे लिए भगवदगीता का ज्ञान था। उस इन्सान के शब्द आज भी मेरे कानों में गूंजते हैं। मैं उस इन्सान को नहीं जानता लेकिन उसके ये शब्द जब मेरे कानों में आते हैं तो आज भी रोंगटे खड़े कर देते हैं। अभी हाल ही में इन शब्दों ने मुझे दोबारा प्रेरणा दी, दोबारा ऊर्जा दी।

18 फरवरी 2020 में सुबह जब मैं सो कर उठता हूँ। मेरी कमर टेढ़ी हो चुकी थी। मुझसे खड़ा नही हुआ जा रहा था। मैं बार बार गिरे जा रहा था। बहुत दर्द में था। दोस्तों की मदद से, लोगों की मदद से मैं हॉस्पिटल पहुँचता हूँ। हॉस्पिटल में डाक्टर मेरी MRI करवाता है। डाक्टर कहता है, “श्रीवास्तव जी, आपको Bone Marrow Cancer है।”

मेरी ज़िन्दगी बिखर गई, छिन्न भिन्न हो गई। हाथ से ज़िन्दगी जाती हुई दिख रही थी। मौत सामने से दौड़ती हुई नजर आ रही थी। फिर मैं रोने लगा। खैर, डाक्टर ने २-३ टेस्ट और बोले। टेस्ट हुए और उनकी रिपोर्ट आने में टाइम था। मैं घर पहुँचा और घर पहुँच कर २ – ३ दिन अकेला अपने कमरे में रहा। रोज मौत को पल – पल करके जी रहा था।

अचानक ये शब्द मेरे कानों में आते हैं। “बेटा आपकी ज़िन्दगी इस लायक थी कि बचाई जा सके, इसलिए बचाई गई। पता नहीं कहाँ से मेरे मन में ऊर्जा का संचार होता है और मैं ये बोलता हूँ कि आप ये दुनिया तब तक नहीं छोड़कर जाओगे जब तक आप लोगों की ज़िन्दगी प्रभावित नहीं करते। मैं उसी दिन प्रण लेता हूँ की मैं ये दुनिया कम से कम दस लाख पैरेंट्स की ज़िन्दगी में टिप्स देने के बाद और उनके बच्चों के जीवन में मूलभूत परिवर्तन करने के बाद दुनिया छोडूंगा और मैं इस मिशन पर लग गया।

मैं सोशल मीडिया के माध्यम से 18 फरवरी 2020 और 14 जून 2020 के बीच करीब करीब दो लाख पेरेंट्स की ज़िंदगी को प्रभावित कर चुकां हूँ। मेरा मिशन 2025 तक दस लाख ज़िंदगी को प्रभावित करने का है। कब किसके द्वारा बोला गया एक छोटा सा वाक्य, एक छोटा सा शब्द, आपके जीवन को किस तरह से बदल कर रख देता है, आप नहीं जानते।

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