• October 3.2020

  • नीरू हसीजा

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आपकी हर समस्या का एक ही हल है – आत्मविश्वास जीवन में अगर कभी कोई समस्या न हो तो प्रगति नहीं हो सकती, आपको अपनी शक्तियों का अहसास तभी होगा, जब आप समस्या से लड़ने के लिए तैयार होंगे। बस चुनौती को स्वीकार कीजिये, पीछे मत हटिये। कुछ ऐसा ही विशवास रखा नीरू हसीजा जी ने जिनकी कहानी ज़िद्द की हमें यह यकीं दिलाती है की बस चुनौती को स्वीकार कीजिये, पीछे मत हटिये।

“जब मैं आठ साल की थी तब मैं एक नर्स बनना चाहती थी. मेरे दिल की तमन्ना थी कि मैं बॉर्डर पर जा कर सैनिकों के घावों पर मरहम लगाऊँ और उनको ठीक करूं। लेकिन किस्मत ने मुझे स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया में शाखा प्रमुख बना दिया। मैंने अपनी ज़िन्दगी के 23 साल बैंक में लगा दिए।

लेकिन कई बार ऐसा होता है कि आपकी ज़िन्दगी में बहुत बड़ा बदलाव आ जाता है। जैसा कि हम सब बैंक के कर्मचारिओं के जीवन में होता है कि हर तीन साल बाद उनका कहीं ना कहीं तबादला होता रहता है। जब मेरा तबादला हुआ तो मेरे घर के हालात मुझे permit नहीं कर रहे थे कि मैं दुसरे शहर जाऊं। परिवार के निर्णय को लेते हुए मुझे अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा। लेकिन दिल के किसी कोने में मैं बहुत खाली महसूस करने लगी। बिल्क़ुल वैसे ही जैसे आपका कोई बहुत ही नजदीकी रिश्तेदार आपसे जुदा हो जाता है या कोई बहुत ही कीमती चीज आपसे अलग हो जाती है। तो आपको जैसा महसूस होता है वैसा ही मुझे महसूस होने लगा।

मैं उदासी महसूस करने लग गई जैसा हर अवसाद के मरीज के साथ होता है। वो अपने आस पास के लोगों की निंदा करने लग जाता है। ईश्वर को अपराधी ठहराता है। उसको ऐसा लगता है कि उसकी जिंदगी में कोई बदलाव नही आ सकता। इसी वजह से जो मेरे आसपास के रिश्ते थे, वो भी खराब होने लग गए। एक बार मैंने सुना कि – the quality of life is directly proportional to the communication between you and you . अर्थात आपके जीवन की विशेषता इस बात पर निर्भर करती है कि आपका अपने आप से संवाद कैसा है।

मेरी ज़िंदगी में एक बहुत बड़ा बदलाव आया। मैंने अपने आप को उठाया। अपने आप को प्रोत्साहित किया। मैंने self – development और self – growth पर बहुत सारी किताबें पढ़ी। मेरी ज़िन्दगी में एक बहुत बड़ा बदलाव आया। मेरी नकारात्मक सोच धीरे धीरे सकारात्मक होने लग गई। मेरे परिवार के सदस्य इस सकारात्मक बदलाव को देखकर खुश होने लग गए।

मेरे रिश्ते ठीक होने लग गए। मैं अपने आसपास के लोग जो कि नकारात्मक थे या अवसाद में थे, मैं उनके दर्द को महसूस कर पा रही थी। मैंने उन लोगों को भी उस पीड़ा से बाहर आने में सहायता की। धीरे धीरे मैंने पूरे देश के स्कूलों और कॉलेजों में motivational lectures देने शुरू किए। मेरा सिर्फ यही मकसद था कि मैं युवा वर्ग को प्रेरित कर सकूं। 2018 में मुझे हरयाणा के 50 अधिकांश प्रभावशाली लोगों में चुना गया। 2019 में मुझे हरयाणा में मेरी निश्वार्थ सेवाओं के लिए Indian Legend Award मिला। इसी तरह मुझे कई पुरस्कार मिलते गए।

ईनाम या पुरस्कार महत्वपूर्ण नहीं हैं। जैसे ही मैंने अपनी ज़िंदगी के उस सम्मान को विकास और प्रेरणा की तरफ मोड़ा, मेरी ज़िंदगी में एक चमत्कारी परिणाम आ गया। मेरी ज़िंदगी का केवल एक ही मंत्र है कि हमारे जीवन में जो भी घटनाएं होती हैं उनका अपने आप में कोई अर्थ नही होता। लेकिन क्या हम उसको अर्थ देते हैं। उसी तरह से हमारे जीवन में भावनाएं विकसित होती हैं। मनोभाव बनते हैं। वैसे ही हमारा व्यवहार होता है। वैसे ही हम कदम उठाने के लिए मजबूर हो जाते हैं। आपकी तकदीर आप के हाथ में है जब तक आप अपने ऐक्शन को सही तरीके से वयक्त करें।“

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