• April 16.2020

  • VIJAY PAWAR

देश की सबसे कठिन और ख्यातिप्राप्त यूपीएससी की परीक्षा में हर साल लाखों लोग शामिल होते हैं, लेकिन कामयाबी उन्हें ही मिलती है जो विलक्षण होने के साथ ही सफलता के लिए जुनूनी होते हैं। वर्ष 2018 में यूपीएससी की परीक्षा में 316वीं रैंक हासिल करने वाले महाराष्ट्र के नवजीवन विजय पवार के पिता किसान हैं, जबकि माता टीचर हैं। बचपन से ही पढ़ाई के प्रति गंभीर नवजीवन ने स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद इंजीनियरिंग की पढ़ाई की। इसके बाद वे लग गए सिविल सर्विसेज की परीक्षा की तैयारी करने में।
किसान और शिक्षक का बेटा आईएएस की मुख्य परीक्षा से पहले डेंगू से पीडित हो गया। हौसलों ने जवाब दे दिया था। ऐसे में एक ज्योतिष की भविष्यवाणी सत्य साबित होने जा रही थी, जिसमें उसने कहा था कि वह कभी आईएएस नहीं बन सकता। लेकिन इस किसान के बेटे ने हार नहीं मानी और बाजी जीत कर उस ज्योतिष की बातों को भी झुठला दिया। अस्पताल में 15 दिनों के इलाज के बाद जब नवजीवन को डेंगू से आराम मिला तो वापस लौटकर दिल्ली आए, लेकिन अबकी बार वे काफी डिप्रेस हो चुके थे। परेशान नवजीवन को उनके दोस्तों ने हिम्मत बांधी। आखिरकार साल 2018 में नवजीवन की मेहनत रंग लाई। फिर क्या था उन्होंने यूपीएससी की परीक्षा क्रेक कर 316वीं रैंक हासिल किया। यूपीएससी की तैयारी करने के लिए वे दिल्ली आ गए। यहां आकर उन्होंने पढ़ाई शुरू कर दी, लेकिन यहां नवजीवन ने तैयारी के लिए किसी कोचिंग का सहारा नहीं लिया। स्वाध्याय को फोकस करते हुए उन्होंने जमकर तैयारी की। इसका नतीजा हुआ कि उन्होंने पहली बार में ही मेन्स एग्जाम तक पहुंच गए। हालांकि इसके बाद उन्हें कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। मेन्स एग्जाम के ठीक पहले उन्हें डेंगू हो गया। इसके बाद ऐसा लगा कि वह परीक्षा में शामिल नहीं हो पाएंगे, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और एक बार हौसला बुलंद किया। उन्होंने बताया कि मेन्स एग्जाम के एक महीने पहले तेज बुखार और शरीर में दर्द होने लगा। अस्पताल में पता चला कि डेंगू से पीडित हैं। वापस महाराष्ट्र चले गए, जहां से घरवालों ने उन्हें अस्पताल में भर्ती करा दिया। अस्पताल में एक हाथ में डॉक्टर इंजेक्शन लगा रहे थे, तो दूसरे हाथ में वह किताबें लेकर जुटा रहा।

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