• October 17.2019

  • VINOD PHUTELA

मैं व्यवसाय से माइंड ट्रेनर हूँ। आज से कई साल पहले जब मैंने अपने काम का सफर शुरू किया था तब एक शिक्षाविद होने के नाते मुझे लगा की हमारे आस पास ऐसे कई बच्चे हैं जो पढ़ाई में काफी परेशानियों का सामना कर रहे हैं, उन्हें याद करने में तकलीफ होती हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि हमारा शिक्षा प्रणाली सिर्फ दो चीज़ो में काम करता है जो की पहला कैसे पढ़ना है और दूसरा कैसे लिखना है। लेकिन आज के बच्चों को किस तरा से याद करना है उसका ज्ञान नहीं है।
हमारा पूरा पाठ्यक्रम मेमॉरी पर आधारित है लेकिन आज बच्चों की याद करने की क्षमता ही कम है। तब मुझे लगा की शिक्षाविद होने की वजह से यह मेरा फ़राज़ बनता है की मैं इन बच्चो के लिए कुछ करूं। मैंने अपने अनुभव से कुछ ऐसी तकनीक निकाले की बच्चे उसको इस्तेमाल कर कुछ भी आसानी से याद कर सकें। आज हमारी अकादमी में ऐसे बच्चे भी हैं जो केमिस्ट्री का पूरा आवर्त सारणी मुँह ज़ुबानी जनता है। ढाही साल का बच्चा सभी देश के नाम उनके राजधानी जनता है। दस साल का बचा पूरा भारत का सविधान जानता है। ये चैलेंज लेना मेरे लिए एक ज़िद्द थी जिसको मैंने पूरा करा। मुझे अपने इस सपने को पूरा करने में कई परेशनियां आई। बच्चों के माँ बाप को समझाना, बच्चों को तकनीक पैर विश्वास दिलाना जिससे उनकी याद करने की क्षमता में सुधार आये ऐसे कई पड़ाव आये जिनको मेने पार किया।मेरी अपनी बेटी जिया फुटेला गूगल गर्ल के नाम से जानी जाती है। शुरुआत में स्कूलों – कॉलेजो ने, एजुकेशन सिस्टम ने मुझ पर विश्वास नहीं किया लेकिन जब उन्होंने बच्चो के परिणाम देखे तो उन्होंने भी मुझ पर और मेरी शिक्षा के तकनीकों पर यकीन आया । आज मुझे लगता है की जो माने कुछ साल पहले अपनी शिक्षा प्रणाली को बदलने की ज़िद्द ठानी थी वो कई हद तक पूरी हो गयी है।

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