खुद का घर लेने की चाह ने बनाया ज़िद्दी |
  • January 24.2019

  • Jay Shankar

संघर्ष के पद पर चलने की क्षमता ज़िद्द से ही आती है। इंसान के ज़िद्द के आगे भगवान भी झुकता है । ज़ब ज़िद्द अपनी चरम सीमा पर पुहंच जाती है तब भगवन भी अपने भक्तों को उस ज़िद्द से मिलाने मै साथ देता है ।अटल इच्छा कुछ कर दिखाने और आगे बढ़ने का होंसला देती हैं।ऐसे ही एक ज़िद्द कि कहानी सुनो जय शंकर शर्मा कि जुबानी।

जब मैंने 2011 मैं AIPL Marketing Pvt. Ltd. कंपनी ज्वाइन करी थी, तब हलात अब जैसे नहीं थे। लोगो के हाथो मै इंटरनेट कि सुविधा तक नहीं थी ,जैसे अब हैं। उस वक़्त कंपनी की सेल्स भी बहुत कम थी , और मुझ पर बहुत प्रेशर था सेल्स बढ़ाने का। पर मैं हालातों से घबराया नहीं, बल्कि मैं समझ गया था की मेरे पास एक यही मौका था अपनी काबलियत दिखाने का। उस समय कंपनी आमतौर पर लाखो मै सेल्स करती थी और मैंने संकल्प लिया कि मैं इस राशि को करोड़ो मै करके दिखाऊंगा।

मैंने और मेरी टीम ने जी जान लगा दी,अपना टारगेट पूरा करने मै। शुरुवात मै काफ़ी बुरा वक़्त देख लिया था यहाँ तक कि एक वक़्त ऐसा भी आया जब मैंने हार मान ली थी। पर जब भगवान तुम्हारे साथ हो तो इंसान खुद पीछे हटना चाहे तब भी पीछे नहीं हट पाता। निराशा के उस वक़्त जब मैं हार मान चुका था तब मेरी ज़िद्द की आग ने मुझे फिर खड़ा कर दिया। तब मैंने तय कर लिया कोई भी चट्टान मेरे लक्ष्य मै आ भी जाए फिर भी मैं अपनी ज़िद्द को पूरा करके रहूँगा। कड़ी मेहनत के बाद मैंने और मेरी टीम ने करोड़ का टारगेट हासिल किया। मेरी कंपनी का मै पहला वयक्ति था जिसने करोड़ मै टारगेट किया था।

एक ज़िद्द कुछ कर दिखाने तथा कुछ हासिल करने कि, मुझे तरक्की के रहा पर ले आयी आज की तारिक़ मै मेरी कंपनी उच्चाईयाँ छू रही हैं जिसमे मेरा और मेरी टीम का महत्वपुर्ण योगदान है।सब हासिल हुआ और अब अपना घर लेने की कामना है और वो ज़िद्द भी जल्द ही पूरी हो जाएगी।

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